Saturday, April 11, 2020

प्राइवेट स्कूलों के संचालकों व शिक्षकों की आर्थिक स्थिति दयनीय,स्कूलों को खोलने एवं चुनावी वादे अनुसार बेरोजगारी भत्ते की मांग

रांची।
झारखंड गैर सरकारी स्कूल संचालक संघ ,झारखंड, राँची केंद्रीय अध्यक्ष श्री राम प्रकाश तिवारी ने प्रेस बयान जारी करते हूए झारखंड राज्य के माननीय मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन जी,शिक्षा मंत्री श्री जगरनाथ महतो और स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग,झारखंड सरकार के प्रधान सचिव श्री अमरेंद्र प्रताप सिंह से मांग करते हुए कहा है कि झारखंड राज्य में लगभग पैंतालीस हजार छोटे छोटे प्ले प्राइवेट स्कूल, और प्राइमरी-मिडिल-हाई प्राइवेट स्कूलो में कार्यरत लगभग साढ़े आठ लाख शिक्षको,शिक्षिकाओं,कर्मचारियों के सामने कोरोना वायरस महामारी के कारण केंद्र सरकार एवं झारखंड सरकार द्वारा दिनांक-24.03.2020 को पूर्ण लाँकडाउन करने और प्राइवेट स्कूलो को बन्द करने के आदेश के बाद कुल सत्रह दिनो तक स्कूल बन्द होने से आर्थिक स्थिति दयनीय हो गई है कारण स्कूल संचालकों का हजारों, लाखों रूपया शुल्क अभिभावकों के पास बकाया रहने से उनकी आर्थिक स्थिति खराब हो गई है जिसके कारण शिक्षकों-शिक्षिकाओं, कर्मचारियों को वेतन के साथ स्कूल भवन,मैदान का किराया, बिजली बिल का भुगतान नहीं कर पा रहे है और अपने परिवार के जीविकोपार्जन नहीं कर पा रहे है। झारखंड सरकार से संघ मांग करती है कि 1. उपयुक्त सभी बकाया का भुगतान करने के लिए झारखंड सरकार तत्काल राज्य के लगभग पैंतालीस हजार छोटे छोटे, मध्यम प्राइवेट स्कूलो को राहत देने हेतु वित्तीय आर्थिक सहायता अनुदान प्रदान करें।
2. झारखंड राज्य में पूर्ण लाँकडाउन के कारण बन्द छोटे छोटे हजारों प्राइवेट स्कूलो और सरकारी स्कूलो में पढ़ने वाले लाखों आदिवासी, दलित, पिछड़े,अल्पसंख्यक, उच्च वर्गों के गरीब बच्चों-बच्चियों(छात्रो-छात्राओं)की पढ़ाई ठप्प होने से उनके भविष्य ,पढ़ाई चौपट हो रही है और लाखों गरीब परिवार के घरो में कम्प्यूटर ,नेंट की सुविधा नहीं है आँनलाइन पढाई कैसे होगी ?
झारखंड सरकार से संघ मांग करते है झारखंड राज्य में ग्रामीण क्षेत्रों, कस्बों,छोटे शहरो,या बड़े शहरों में कोरोना महामारी का प्रकोप नहीं है साफ- सफाई,मास्क लगाकर एक मीटर की क्रमानुसार दूरी पर बच्चों-बच्चियो को बैठाकर खुले मेंदान,कमरों में पढ़ने हेतु कुछ शर्तों पर लाँकडाउन हटाने और स्कूल खोलने और पढ़ाई शुरू कराई जाये।
3.कोरोना वायरस का संक्रमण जिन क्षेत्रों में फैला है वहाँ लाँकडाउन जारी रखा जाये। सभी गाँवो ,शहरों की गली मुहल्लों में रसायनिक छिड़काव और सफाई अभियान चलाया जाये और गांवों-शहरो में आम नागरिकों की मदद से व्यापक सफाई, स्वस्थ्यता अभियान चलाया जाये।
4.कोरोना वायरस से बचाने के लिए सभी नागरिकों को मलेरिया प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने का टीका लगाने हेतु व्यापक अभियान शुरू किया जाये।ताकि संक्रमण की संभावना कम हो।
5. कोरोना वायरस के संक्रमण से पीड़ित नागरिकों को चिन्हित करने हेतु सभी घरो में डाक्टरों, मेडिकल टीम द्वारा जाँच कराया जाये।जो कोरोना पीड़ित है छिपे हूए अपनी बिमारी छिपा रहे है और जानबुझकर कोरोना वायरस आम नागरिकों की जान माल का नुकसान पहुंचाने हेतु कोरोना वायरस का प्रसार कर रहे है उनके खिलाफ साक्ष्य मिलने पर भारतीय दण्ड संहिता धारा 307,302,120बी एवं देशद्रोह के तहत् प्राथमिक दर्ज करके जेल में भेजकर जेल अस्पताल में उनका इलाज किया जाये।
झारखंड सरकार यह सुनिश्चित करे कि जिस गांव,शहर की गली मुहल्लों में कोरोना वायरस नहीं फैला है वहाँ बाहरी लोगों के प्रवेश पर रोक लगाकर गली मुहल्लों में स्थित प्राइवेट/सरकारी स्कूलो में मास्क लगाकर बारी बारी कक्षाओ की पढ़ाई शुरू कराया जाये।
श्री राम प्रकाश तिवारी ने झारखंड सरकार से यह भी मांग किया सभी प्राइवेट स्कूलो के शिक्षकों, शिक्षिकाओं, कर्मचारियों और सभी शिक्षित बेरोजगारों को अपने चुनावी वादे अनुसार प्रति माह सात हजार रूपये का बेरोजगारी भत्ता का भुगतान 1 जनवरी 2020 से 31 मार्च 2020 तक कुल तीन माह का 21,000/- भुगतान करने की तत्काल कार्रवाई करें।सरकार ने अभी तक एक रूपया बेरोजगारी भत्ता बेरोजगारों को नहीं दिया है जो दुखद् है।

वहीं झारखंड गैर सरकारी विद्यालय संघ के अध्यक्ष मो. ताहिर हुसैन ने भी पीएम एवं सीएम सहित कई मंत्रियों को त्वित्त किया है। इस ट्वीट में मांग की गई है कि
ट्वीट में बताया गया है कि कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाव हेतु संपूर्ण देश में भारत सरकार एवं राज्य सरकारों द्वारा लॉकडाउन किया गया है, जिसके कारण संपूर्ण देश में सभी विद्यालय व महाविद्यालय पूर्ण रुप से बंद हैं। ऐसी परिस्थिति में वैसे निजी विद्यालय जिन्हें सरकार द्वारा किसी प्रकार का कोई अनुदान अथवा वित्तीय सहायता नहीं मिलता है, वह पूर्ण रूप से विद्यार्थियों से मिलने वाले फीस की राशियों पर निर्भर रहते हैं । ऐसे विद्यालयों में कार्यरत शिक्षक व शिक्षकेतर कर्मी ही वास्तव में समाज सेवा एवं राष्ट्र सेवा में अपना समर्पण एवं त्याग की एक आदर्श भूमिका निभाते हैं, क्योंकि इन विद्यालयों में कार्यरत शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मी उच्च योग्यताधारी एवं दक्ष रहने के बावजूद भी रिक्तियों के अभाव में सरकारी नौकरिया नहीं मिलने के कारण 3 से 8 हजार रुपये तक मासिक मानदेय पर नौकरी कर रहे हैं तथा राष्ट्र निर्माण में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।

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