Thursday, December 29, 2022

विदेशों से डॉक्टर बन कर आए लोगों पर सीबीआई की छापेमारी



14 राज्यों के मेडिकल काउंसिल के खिलाफ देशव्यापी छापेमारी के तहत बोकारो के चिरा चास स्थित आशियाना गार्डन में सीबीआई ने एक घर पर दबिश दी तथा एक ब्यक्ति मुकेश कुमार को अपने साथ ले गई। फिलहाल मुकेश कुमार के घर में ताला बंद है। मिली जानकारी के अनुसार शिव शक्ति कॉलोनी चास निवासी सोवियत रूस में 2012- 2015 बैच में मेडिकल की पढ़ाई की थी। लेकिन वहां से लौटने के बाद मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा ली जाने वाली एफएमजी की परीक्षा में असफल हो गया। इसके बावजूद बिहार मेडिकल काउंसिल से अपना रजिस्ट्रेशन फर्जी प्रमाणपत्र जमा कर कराया। जिसका रजिस्ट्रेशन नंबर 437002 है। मुकेश कुमार चास थाना अंतर्गत शिव शक्ति कॉलोनी में अपने पैतृक आवास पर रहता था। लेकिन कथित डॉक्टर बनने के बाद पैतृक आवास को छोड़कर चिरा चास स्थित आशियाना गार्डन के गणपति टावर में फ्लैट नंबर 52 में रह रहा था। अपने पत्नी एवं बच्चे के साथ रह रहा था हाल में ही उसके पिता का निधन हुआ है। मिली जानकारी के अनुसार देशभर में छापेमारी के तहत यह कार्रवाई की गई है। लगभग 45 डॉक्टरों के साथ-साथ 12 राज्यों के मेडिकल काउंसिल के खिलाफ भी छापेमारी की गई है। जिन्होंने फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर रजिस्ट्रेशन नंबर दिया था एवं उस रजिस्ट्रेशन नंबर के आधार पर डॉक्टर प्रैक्टिस कर रहे थे। भारत सरकार की स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की शिकायत पर सीबीआई की दिल्ली स्थित एंटी क्राइम के एक थाने में 21 दिसंबर को प्राथमिकी दर्ज हुई थी। पत्र लिखकर मंत्रालय ने यह जानकारी दी थी कि फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर विभिन्न अस्पतालों में प्रैक्टिस करने वाले ये कथित चिकित्सक आम जनता के हित में नहीं हैं, इनके विरुद्ध कार्रवाई करें। मंत्रालय ने अपनी शिकायत में बताया था कि विदेश से मेडिकल स्नातक को भारत में स्क्रीनिंग जांच पास करने के बाद ही नेशनल मेडिकल कमीशन या स्टेट मेडिकल काउंसिल से रजिस्ट्रेशन संभव है। यह स्क्रीनिंग जांच परीक्षा राष्ट्रीय परीक्षा बोर्ड (एनबीई) के माध्यम से होता है, जो प्रमाण पत्रों की जांच से लेकर परीक्षा तक लेती है। एनबीई ने ही गत 12 सितंबर व 17 अक्टूबर को स्वास्थ्य मंत्रालय से अनुशंसा की थी कि 73 ऐसे विदेशी मेडिकल स्नातक हैं, जो भारत में स्क्रीनिंग टेस्ट पास नहीं किए और उनका विभिन्न राज्यों में प्रैक्टिस के लिए पंजीयन भी हो गया। इसके बाद ही स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस रैकेट का खुलासा करने के लिए सीबीआइ से पत्राचार किया, जिसके बाद सीबीआइ ने नियमित केस दर्ज कर अनुसंधान शुरू की है और इसी सिलसिले में सभी 91 ठिकानों पर छापेमारी की है।

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