Monday, November 25, 2019
पत्रकार ही एक समाज का ऐसा व्यक्ति है जो निष्पक्ष रूप से अपने काम को अंजाम देता है.....- राजेन्द्र प्रसाद व अनिल तिवारी,वरिष्ठ पत्रकार,चक्रधरपुर - खूंटी
पत्रकार ही समाज का एक ऐसा ब्यक्ति होता है जो निष्पक्ष रूप से अपने काम को अंजाम देता है। वह जिंदगी भर दूसरों की सेवा करने में समर्पित होता है। लेकिन फिर भी लोग उसे बदनाम करते है। पत्रकार को सभी ब्यक्ति के पास जाकर उसके सुख दुख में खड़ा होना पड़ता है। जब उसका एक्सीडेंट होता है या उसे कोई मुश्किलें आती है तो उसकी मदद पत्रकार ही करता है।फिर भी जो सम्मान उसे समाज को देनी चाहिए, वह समाज नहीं देती नहीं है। यह आश्चर्य की बात है! मनुष्य भला कैसे इतना स्वार्थी हो गया! जो आपका भला चाहता है। आपके हर सुख दुख में काम आता है । उसकी उपेक्षा क्यों........ । - अनिल तिवारी,...... । मैं इस लेख से कतई सहमत नहीं हूं महाश्य ! क्योंकि ये पत्रकार पक्ष की भावना को ही इंगित कर लिखा गया है - असलियत तो कोई भुक्तभोगी ही बतला सकता है , जैसे कि स्वयं मैं । 21 फरवरी 2018 को मेरा कार एक्सीडेंट हुआ । उस भयंकर दुर्घटना में मेरी गर्भवती बेटी के साथ ही नतनी तथा पोती का दुःखद निधन हो गया । स्वयं मैं , मेरा छोटा बेटा तथा पतोहू सहित एक अन्य घायलावस्था में रांची के मेडिका अस्पताल में काफी दिनों तक रहे । इस हादसे में नेतागण से लेकर स्वयं मुख्यमंत्री तथा स्थानीय विधायक सह मंत्री के अलावे प्रत्येक जाति- समुदाय के हजारों लोगों ने भरपूर सहयोग किया । मेरी स्थिति ऐसी थी की वे के देहांत की जानकारी साढ़े तीन महीने बाद ही मुझे तब दी गई थी , जब मैं कुछ स्वस्थ्य हो गया । इतनी लम्बी अवधि के दौरान दो - तीन पत्रकार को छोडकर किसी भी पत्रकार ने मेरा अथवा शोकाकुल परिजनों की सुध लेने की जरूरत ही नहीं समझी । यहां तक की उन आधा दर्जन पत्रकारों ने भी नहीं , जिन्हें पत्रकार के पेशे में स्वयं मैंने पैदा किया । पिछले 29 साल से मैं सिर्फ पत्रकारिता ही करता रहा हूं और जिन आधुनिक कथित पत्रकारों का मैं जिक्र कर रहा हूं , उन्हें डिक्टेशन लिखा - लिखा कर समाचार लिखना सिखलाया , लोगों से और संस्थाओं से परिचित कराया तथा जिनके हर मुसीबत में ढाल बनकर मैंने उनपर आंच नहीं आने दी / हमेशा सहयोगी रहा । बाद में उन्हीं में से किसी पत्रकार ने कई जगह जमीन खरीदी , अपनी परिवार की आर्थिक दशा में सुधार किया तो किसी ने कार खरिदा । इस कटु सच्चाई को खूंटी में प्रायः वे सभी जानते और मानते हैं , जिनकी आयु अब 50 पार कर चुकी है । तिवारी जी यही अकाट्य सच्चाई है । इसीलिए स्वयं भुक्तभोगी मैं राजेन्द्र प्रसाद इससे कतई सहमत नहीं की मुसीबत में पत्रकार की सहायता पत्रकार ही करते हैं , अन्य लोग नहीं । वास्तव में अन्य लोग ही सहयोगी होते हैं , पत्रकार या कोई संपादक अथवा मिडिया कम्पनी के संचालक नहीं । इस आत्मानुभव को मैंने दिल से महसूस किया है और तमाम जाति- धर्म के सहयोगी जनों के प्रति ताजिंदगी ऋणी और आभारी रहूंगा । 🙏🏻✍🏻 राजेन्द्र प्रसाद , खूंटी - ब्युरो चीफ सांध्य दैनिक मेट्रो रेयज रांची ।
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