श्री प्रसाद सोनी।हजारीबाग:जिले के भेलवारा पंचायत अंतर्गत बिसूइया निवासी लालजी सौरेन के 32 वर्षीय पुत्र महादेव सौरेन का शव 52 दिनों बाद अफ़्रीका के मरूतानियां से रविवार बिसूइया पहुंचा।रांची से एम्बुलेन्स से उनके शव को बिसूइया लाया गया। बताते चलें कि पिछले 27 मई को की अफ़्रीका के मरूतानियां में मौत हो गयी थी।महादेव सौरेन वहाँ कल्पतरू ट्रांसमिशन कंपनी में कार्यरत था। कंपनी ने उसकी मौत के बाद मुआवजा देने में अनाकानी करने के कारणों शव मरूतानियां से भारत आने के बाद 29 जून से 20 दिनों बाद भी दिल्ली से बिसूइया नही लाया जा सका था।प्रवासी मजदूरों के हित में कार्य करने वाले समाजसेवी सिकन्दर अली व समाजसेवी महेन्द्र कुमार कंपनी से लगातार दूरभाष पर मुआवजा को लेकर किये गये प्रयास से मृतक के परिजनो को कंपनी के द्वारा 6 लाख पचास हजार रूपये का बैंक ड्रफ्ट व 25 दिनों के अंदर पांच लाख रूपये की बीमा राशि व सैलेरी की राशि कंपनी के द्वारा दी जायेंगी।इसके अलावा कंपनी ने अंतिम संस्कार के लिए 55 हजार रूपये दी हैं।महादेव सौरेन अपने पीछे पत्नी मंजू देवी, बेटी सविता कुमारी(11), रविवंती कुमारी (08), प्रमिला कुमारी और एकलौता पुत्र हेमंत सोरेन(05)को छोड़ गया है।इस मौके पर भाजपा के सक्रिय सदस्य हिरामन महतो ने संवेदना प्रकट करते हुए कहा कि ऐसे परिवारों को सरकार की ओर से मदद मिलनी चाहिए।वहीं शव को रिसीव करने रांची पहुंचे सिकन्दर अली ने कहा कि विदेशों में रोज़ी रोटी कमाने जाने वाले झारखंड के नौजवान की फजीहत में पड़ने व मौत के मुँह में समा जाने की यह पहली घटना नहीं हैं।इससे पहले भी कई लोगों की मौत हो चुकी हैं।इसलिए ऐसे विकट परिस्थितियों में सरकार को प्रवासी मजदूरों की पलायन रोकने के लिए रोजगार की व्यवस्था करनी चाहिए।झारखंड ट्रांसमिशन एसोसिएशन के अध्यक्ष रामलाल महतो,भाजपा युवा नेता संतोष कुमार समेत दर्ज़नों लोग मौजूद थे।
Sunday, July 19, 2020
लगभग दो माह बाद मरूतानियां से पहुँचा महादेव सोरेन का शव
श्री प्रसाद सोनी।हजारीबाग:जिले के भेलवारा पंचायत अंतर्गत बिसूइया निवासी लालजी सौरेन के 32 वर्षीय पुत्र महादेव सौरेन का शव 52 दिनों बाद अफ़्रीका के मरूतानियां से रविवार बिसूइया पहुंचा।रांची से एम्बुलेन्स से उनके शव को बिसूइया लाया गया। बताते चलें कि पिछले 27 मई को की अफ़्रीका के मरूतानियां में मौत हो गयी थी।महादेव सौरेन वहाँ कल्पतरू ट्रांसमिशन कंपनी में कार्यरत था। कंपनी ने उसकी मौत के बाद मुआवजा देने में अनाकानी करने के कारणों शव मरूतानियां से भारत आने के बाद 29 जून से 20 दिनों बाद भी दिल्ली से बिसूइया नही लाया जा सका था।प्रवासी मजदूरों के हित में कार्य करने वाले समाजसेवी सिकन्दर अली व समाजसेवी महेन्द्र कुमार कंपनी से लगातार दूरभाष पर मुआवजा को लेकर किये गये प्रयास से मृतक के परिजनो को कंपनी के द्वारा 6 लाख पचास हजार रूपये का बैंक ड्रफ्ट व 25 दिनों के अंदर पांच लाख रूपये की बीमा राशि व सैलेरी की राशि कंपनी के द्वारा दी जायेंगी।इसके अलावा कंपनी ने अंतिम संस्कार के लिए 55 हजार रूपये दी हैं।महादेव सौरेन अपने पीछे पत्नी मंजू देवी, बेटी सविता कुमारी(11), रविवंती कुमारी (08), प्रमिला कुमारी और एकलौता पुत्र हेमंत सोरेन(05)को छोड़ गया है।इस मौके पर भाजपा के सक्रिय सदस्य हिरामन महतो ने संवेदना प्रकट करते हुए कहा कि ऐसे परिवारों को सरकार की ओर से मदद मिलनी चाहिए।वहीं शव को रिसीव करने रांची पहुंचे सिकन्दर अली ने कहा कि विदेशों में रोज़ी रोटी कमाने जाने वाले झारखंड के नौजवान की फजीहत में पड़ने व मौत के मुँह में समा जाने की यह पहली घटना नहीं हैं।इससे पहले भी कई लोगों की मौत हो चुकी हैं।इसलिए ऐसे विकट परिस्थितियों में सरकार को प्रवासी मजदूरों की पलायन रोकने के लिए रोजगार की व्यवस्था करनी चाहिए।झारखंड ट्रांसमिशन एसोसिएशन के अध्यक्ष रामलाल महतो,भाजपा युवा नेता संतोष कुमार समेत दर्ज़नों लोग मौजूद थे।
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