Friday, September 13, 2019

बैजनाथ सभागार सीधी में नाटक छोहर का मंचन सफल रहा


रोशनी प्रसाद मिश्र द्वारा लिखित वा निर्देशित नाटक 'छोहर' की रही मनमोहक प्रस्तुति..........
नाटक छोहर को देख दर्शकों के आंखों में छलके आंसू

बीती रात सीधी के दक्षिण करौंदिया में स्थित बैजनाथ सभागार में नाटक छोहर की सफल प्रस्तुति हुई, उक्त नाटक की प्रस्तुति सव्यसांची आवासीय आदिवासी कन्या शिक्षा परिसर सरेठी की बाल कन्याओं ने दिया, यह आयोजन इन्द्रवती नाट्य समिति सीधी एवं उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र प्रयागराज उत्तरप्रदेश के संयुक्त तत्वावधान में हुआ, बता दें कि यह नाटक 15 दिवसीय लोक नाट्य कार्यशाला के दौरान तैयार कराया गया था जिसका आलेख, परिकल्पना संगीत एवं निर्देशन शहर के युवा रंगकर्मी रोशनी प्रसाद मिश्र ने किया, सहायक निर्देशन रजनीश जायसवाल का रहा, प्रस्तुति संयोजन नीरज कुन्देर, प्रस्तुति प्रबंधन नरेन्द्र बहादुर सिंह, मंच प्रबंधन संतोष द्विवेदी, मंच सामग्री रूपेश मिश्र, रूप सज्जा आरती यादव एवं मीनाक्षी शर्मा, वस्त्र सज्जा करुणा सिंह वा प्रजीत साकेत, प्रॉपर्टी निर्माण डेविड सोलंकी वा भूपेन्द्र पटेल, प्रकाश रजनीश जायसवाल, संगीत सहयोगी प्रजीत साकेत एवं श्याम सुंदर बैगा का रहा ၊
मंच पर संतोषी सिंह, लक्ष्मी बाई सिंह, सीता सिंह, विभा सिंह, प्रीतू सिंह, मंजू सिंह, जया सिंह, रानी सिंह, पुष्पा सिंह शान्ति सिंह, सविता सिंह, रविता सिंह, अनार कली सिंह, कल्पना सिंह, सुहागबती सिंह, आकांक्षा सिंह 1,आकांक्षा सिंह 2,उर्मिला सिंह, राधा सिंह, बेला रानी बैगा ने अपने अभिनय और गायन से सभी दर्शकों का मन मोह लिया lदर्शक दीर्घा में बतौर अतिथि राजेंद्र भदौरिया वरिष्ठ समाजसेवी, इंजी. आर. बी. सिंह राष्टीय उपाध्यक्ष भारत रक्षा मंच, डॉ. शिवशंकर मिश्र 'सरस' वरिष्ठ साहित्यकार, मैथिली शरण शुक्ल वरिष्ठ साहित्यकार, इशरद मंसूरी धर्मेंद्र सिंह प्राचार्य सव्यसांची विद्यालय , सविता विश्वकर्मा, दीपिका सिंह, अरुणा सिंह अखिलेश पाण्डेय संभागीय अध्यक्ष श्रमजीवी पत्रकार संघ, मनोज पाण्डेय पत्रिका, कनिष्क तिवारी एम. पी. संदेश उपस्थित रहे साथ ही शहर के अन्य सदस्यों में बाबूलाल कुन्देर, राम नरेश सिंह चौहान, हरीश सिंह बघेल, आशीष पाण्डेय, रवि भारती सहित भारी मात्रा में महिला पुरुष उपस्थित थे, कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों ने दीप प्रज्वलन कर किया ၊इसके बाद वैष्णवी मिश्रा ने सुन्दर सा गीत प्रस्तुत किया ၊ तदुपरांत नाटक 'छोहर' की प्रस्तुति शुरू हुई, नाटक की शुरुआत सैला नृत्य से हुई, नाटक की कथावस्तु मूलतः सोहर राग परंपरा पर आधारित था, पूरी कहानी एक स्त्री के इर्द गिर्द घूमती है जिसमें आदि अनादि काल से चली आ रही स्त्री समस्या बांझपन को उल्लिखित किया गया है, हलांकि इस नाटक में यह तो नहीं दिखाया गया कि बच्चा न जन्मने का कारण पुरुष की पुरुषत्व की कमी है या फिर महिला के मातृत्व में पर अक्सर यह देखा जाता है कि चाहे कमी जिसमें भी हो लेकिन सुनना स्त्री को ही पड़ता है, बहरहाल इस नाटक को देखने के बाद यह सिद्ध हो गया कि हमारी पारंपरिक शिक्षा पद्धति चाहे वह लोकगीत हो या फिर लोकगाथा या लोककथा हो आज की शिक्षा पद्धति से ज्यादा बेहतर है, आज की शिक्षा प्रणाली में साक्षरता को ज्यादा महत्व दिया जाता है न कि शिक्षा को ၊ नाटक की मनमोहक प्रस्तुति देख दर्शकों के आंखों में आंसू छलक और बाल कलाकारों के सम्मान में तालियों की गड़गड़ाहट से पूरा हांल गूंज उठा ၊ प्रस्तुति उपरान्त अतिथियों ने अपने उद्बोधन में इन्द्रवती नाट्य समिति और त्रिदेव नीरज कुन्देर, रोशनी प्रसाद मिश्र एवं नरेन्द्र बहादुर सिंह की सराहना करते हुए किसे ने शिल्पकार कहा तो किसी कुम्हार की संजा देकर सराहना करते हुए बाल कलाकारों की भूरि- भूरि  प्रशंसा किया साथ ही लोकगीतों पर प्रकाश भी डाला, नाटक की अगली प्रस्तुति सिद्धभूमि इंटरनेशनल स्कूल में कराने की बात आर. बी. सिंह ने कहा तो बाणभट्ट महोत्सव में करने को अखिलेश पाण्डेय ने कहा ၊ वहीं दूसरी ओर गोव्हाटी में भी प्रस्तुति हेतु कहा गया है ၊ तदुपरांत  बाल कलाकार मान्या पाण्डेय ने एक भक्ति गीत प्रस्तुत किया और नाट्य कलाकारों ने नाटक की प्रस्तुति प्रक्रिया के बारे में बताया ၊अंत में नीरज कुन्देर ने सभी अतिथियों एवं दर्शकों का आभार व्यक्त किया ၊

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