न्यूज़ डेस्क। झारखंड में बड़ी सियासी घटना होने जा रही है। इसकी पटकथा पूरी तरह तैयार हो चुकी है। झारखंड विधानसभा चुनाव में बुरी तरह हार चुके दो सियासी दल आपस में विलय कर 'डूबते को तिनके' की तलाश कर रहे है। कभी बीजेपी से अपमानित कर निकाले गए बाबूलाल मरांडी दोबारा बीजेपी में विलय के लिए पूरी तरह से तैयार है। इसके लिए उन्होंने अपनी पूरी पार्टी और यहां तक की अपनी पार्टी के जीते हुए विधायकों तक को ताक पर रख दिया है। 'पद' की लालसा में मरांडी ने अपनी पूरी पार्टी को उजाड़ दिया है। बीजेपी भी उन्हें पद का प्रलोभन देकर पार्टी में शामिल करा लेना चाहती है। जेवीएम ने अपनी पुरानी कार्यसमिति को भांग कर आज नई कार्यसमिति का गठन कर दिया है। मगर हैरानी की बात तो ये है की नयी कार्यकारिणी में बाबूलाल मरांडी ने उन दोनों नेताओ को बाहर का रास्ता दिखा दिया है जो पार्टी का बीजेपी में विलय करने का विरोध कर रहे थे। मरांडी ने इसके साथ ही संकेत दे दिए है की भले वे विलय के सवाल पर गोलमटोल जवाब दे रहे हो। मगर उनकी असली मंशा पद के लालच में पार्टी का बलिदान देना ही रह गया है।
विलय का रास्ता साफ़:
झाविमो विधायक प्रदीप यादव और बंधू तिर्की को झाविमो की नयी कार्यसमिति से बाहर किये जाने के साथ ही बाबूलाल मरांडी के लिए भाजपा में विलय का रास्ता साफ़ हो गया है। जानकारों का मानना है की कार्यसमिति से बाहर होने के बाद प्रदीप यादव और बंधू तिर्की पार्टी के निर्णय में शामिल नहीं हो सकेंगे। विलय का विरोध करने पर मरांडी दोनों विधायकों को झाविमो से निष्कासित भी कर सकते है। ऐसे में दोनों विधायक किसी और दल में शामिल नहीं हो सकेंगे। नयी कार्यसमिति में प्रस्ताव पास कर बाबूलाल मरांडी अपनी पूरी पार्टी का विलय भाजपा में कर सकते है। जिसकी तैयारी वे कई महीनो से कर रहे थे।
हेमंत सरकार से समर्थन वापस लेना होगा:
विलय के लिए बाबूलाल मरांडी पहले हेमंत सरकार से अपना समर्थन वापस लेंगे। हालांकि इससे हेमंत सरकार पर कोई असर नहीं पड़ेगा। फिलहाल बाबूलाल की पार्टी जेवीएम ने बाहर से हेमंत सरकार को समर्थन दे रखा है।
*प्रदीप यादव और बंधू तिर्की विलय का विरोध कर रहे है:*
बताते चले की जेवीएम के दोनों जीते हुए विधायक प्रदीप यादव और बंधू तिर्की जेवीएम का बीजेपी में विलय का खुलकर विरोध कर रहे है। प्रदीप यादव ने यहां तक कहा था की अगर पार्टी का बीजेपी में विलय हुआ तो झारखंडी अधिकारों को लेकर पार्टी का संघर्ष व्यर्थ हो जायेगा। जेवीएम भी झारखंडी विरोधियो के साथ खड़ी नजर आने लगेगी।

No comments:
Post a Comment