दुर्गापुर , 15 मई : कुदरती करिश्माई ही इसे कहेंगे की दोनों दिव्यांग हैं और दोनों में समानता भी हैं। युवती मुंह से नहीं बोल पाती और कान से सुन भी नहीं पाती है। इसी तरह युवक भी न बोल पाता है न सुन पाता है।
मंगलवार के दिन दोनों विवाह बंधन में बंधे। यह शादी औधोगिक शहर दुर्गापुर के सिटी सेंटर स्थित प्राचीन और प्रसिद्ध प्याला काली बाड़ी में हुई। आज इस दंपति का रिशेप्शन है।
युवती बर्दवान के मूक बधिर स्कूल से माध्यमिक तक पढ़ाई की है जबकि युवक रंग मिस्री है। सुलेखा के मां का घर दुर्गापुर स्टील टाउनशीप के एजोन के अशोक एवेन्यू में है। उसकी मां सुनीती चटोपाध्याय एक चाय की दुकान चलाती है जबकि युवक अशोक राय अंडाल का है और रंग मिस्री का काम करता है।
जो सबसे खास बात है वह यह कि , सुलेखा क्रिकेट और बैडमिंटन के खेल में गहरी रुची रखती है। वह जिला स्तर से लेकर राज्य स्तर पर दोनों खेल खेल चुकी है और करीब एक सौ से ज्यादा ट्राफी बटोर चुकी है।
दुर्गापुर के विशिष्ट उधोगपति और कई सामाजिक सांस्कृतिक संगठनों से जुड़े राकेश भट्टड़ ने इस शादी में अपनी सराहनीय भूमिका का पालन करते हुये दंपति को वैवाहिकी साम्रगी देकर कन्या दान का पवित्र रस्मअदायगी किया। राकेश भट्टड़ ने बताया , सुलेखा को राज्य सरकार की ओर से भी सहयोग मिला है। सुलेखा का कहना है कि , शादी के बाद भी वह क्रिकेट और बैडमिंटन खेल को बंद नहीं करेगी।
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