●स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए चुनाव आयोग के बनाए गए नियमों को ही आचार संहिता कहते है....*
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रांची । स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सम्पन्न कराने के लिए चुनाव आयोग कुछ नियम बनाता है। चुनाव आयोग के इन्हीं नियमों को आदर्श आचार संहिता कहते हैं। विधानसभा चुनाव के दौरान उन नियमों का पालन करना प्रशासन, प्रत्याशी एवम राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी होती है।
भारत निर्वाचन आयोग द्वारा आज चुनाव घोषणा के उपरांत आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है एवम चुनाव प्रक्रिया के संपन्न होने तक लागू रहेगी।
*●आचार संहिता के नियम....*
चुनाव आचार संहिता लागू होने के बाद कई नियम भी लागू हो जाते हैं। इनकी अवहेलना कोई भी राजनीतिक दल या राजनेता नहीं कर सकता।
सार्वजनिक धन का इस्तेमाल किसी विशेष राजनीतिक दल या नेता को फायदा पहुंचाने वाले काम के लिए नहीं होगा।
सरकारी गाड़ी, सरकारी विमान या सरकारी बंगले का इस्तेमाल चुनाव प्रचार के लिए नहीं किया जायेगा।
किसी भी तरह की सरकारी घोषणा, लोकार्पण और शिलान्यास आदि नहीं होगा.
किसी भी राजनीतिक दल, प्रत्याशी, राजनेता या समर्थकों को रैली करने से पहले आर0ओ0 से अनुमति लेनी होगी।
किसी भी चुनावी रैली में धर्म या जाति के नाम पर वोट नहीं मांगे जाएंगे।
धार्मिक स्थानों का उपयोग चुनाव प्रचार के मंच के रूप में नहीं किया जाएगा।
मत पाने के लिए भ्रष्ट आचरण का उपयोग न करें। जैसे-रिश्वत देना, मतदाताओं को परेशान करना आदि।
किसी की अनुमति के बिना उसकी दीवार, अहाते या भूमि का उपयोग न करें।
किसी दल की सभा या जुलूस में बाधा न डालें।
राजनीतिक दल ऐसी कोई भी अपील जारी नहीं करेंगे, जिससे किसी की धार्मिक या जातीय भावनाएँ आहत होती हों।
*राजनीतिक सभा....*
सभा के स्थान व समय की पूर्व सूचना पुलिस अधिकारियों को दी जाए।
दल या अभ्यर्थी पहले ही सुनिश्चित कर लें कि जो स्थान उन्होंने चुना है, वहॉँ निषेधाज्ञा तो लागू नहीं है।
सभा स्थल में लाउडस्पीकर के उपयोग की अनुमति पहले प्राप्त करें।
सभा के आयोजक विघ्न डालने वालों से निपटने के लिए पुलिस की सहायता करें।
●जुलूस....
जुलूस का समय, शुरू होने का स्थान, मार्ग और समाप्ति का समय तय कर सूचना पुलिस को दें।
जुलूस का इंतजाम ऐसा हो, जिससे यातायात प्रभावित न हो।
राजनीतिक दलों का एक ही दिन, एक ही रास्ते से जुलूस निकालने का प्रस्ताव हो तो समय को लेकर पहले बात कर लें।
आचार संहिता के उल्लंघन पर कार्रवाई
चुनाव आचार संहिता के नियम सख्ती से लागू होते हैं. अगर इन नियमों का उल्लंघन किया जाता है तो उसके लिए सजा का प्रावधान भी है। चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन पर दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
सरकार के कर्मचारी चुनावी प्रक्रिया पूरी होने तक सरकार के नहीं, चुनाव आयोग के कर्मचारी की तरह काम करते हैं। आदर्श आचार संहिता के लागू होने के पश्चात भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार मुख्यमंत्री या मंत्री अब न तो कोई घोषणा कर सकेंगे, न शिलान्यास, लोकार्पण या भूमिपूजन। सरकारी खर्च से ऐसा आयोजन नहीं होगा, जिससे किसी भी दल विशेष को लाभ पहुँचता हो। राजनीतिक दलों के आचरण और कार्यकलाप पर नजर रखने के लिए चुनाव आयोग के पर्यवेक्षकों की नजर होगी।
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