Wednesday, January 22, 2020

तत्काल रेल टिकट के गोरख धंधे का हुआ पर्दाफाश,गिरिडीह के मुस्तफा समेत 24 गिरफ्तार





#गिरिडीह । तत्काल रेल टिकट काटने के लिए एजेंट सारी हदों को पार कर चुके हैं।

अवैध सॉफ्टवेर से तत्काल श्रेणी के रेल टिकटों की कालाबाजारी से जुड़े मामले में रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) को बड़ी सफलता हाथ लगी है. आरपीएफ ने दलालों के ऐसे गिरोह को दबोचा है, जिसके तार टिकटों की कालाबाजारी के साथ आतंकियों से भी जुड़े हैं।

गिरफ्तार दलालों में गिरिडीह (झारखंड) का रहने वाला मुख्य सूत्रधार गुलाम मुस्तफा समेत 24 लोग शामिल हैं. ये सभी आरोपी क्रिप्टो करंसी और हवाला (मनी लाॅन्ड्रिंग) के जरिए पैसा विदेश भेज रहे थे. मुस्तफा की गिरफ्तारी ओडिशा से की गई. वह बेंगलुरू से टिकटों की कालाबाजारी करता था.

इधर, आरपीएफ के महानिदेशक अरुण कुमार ने बताया कि इस गिरोह के पास उपलब्ध उन्नत तकनीक के बारे में भी पता चला है. इस गिरोह में 20 हजार से अधिक एजेंटों वाले 200 से 300 पैनल देश भर में सक्रिय हैं. इसका मास्टरमाइंड हामिद अशरफ दुबई में बैठा है.धनबाद डिवीजन के हजारीबाग रोड आरपीएफ पोस्ट में इस संबंध में दो मामले भी दर्ज किए गए हैं। आरपीएफ के सीनियर कमांडेंट हेमंत कुमार ने बताया कि आरपीएफ मुख्यालय से मिले इनपुट पर सरिया, हजारीबाग, गोमिया, विष्णुगढ़ और चिचाकी आदि क्षेत्रों के कई लोगों से गुलाम मुस्तफा के प्रत्यक्ष संबंध के संकेत मिले हैं। स्थानीय पुलिस की सहायता से आरपीएफ गुलाम मुस्तफा के धंधे से जुड़े लोगों तक पहुंचने के प्रयास में है। कई लोगों के बैंक खाते, लैपटॉप और मोबाइल खंगाले जा रहे हैं। 

 वह बीते साल गोंडा स्कूल में धमाका करने के मामले से भी जुड़ा है. यह गिरोह पाकिस्तान के प्रतिबंधित संगठन तब्लीगी जमात से जुड़ा है. इसमें बेंगलुरु की एक सॉफ्टवेयर कंपनी भी साझीदार है और गुरुजी के काेडनेम वाला एक उच्च तकनीक में माहिर गिरोह को सक्रिय मदद देता है. 

इस खुलासे के बाद राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए), केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई), खुफिया ब्यूरो (आईबी), प्रवर्तन निदेशालय, कर्नाटक पुलिस की विशेष जांच इकाई भी जांच में जुड़ गई हैं।

अरुण कुमार के मुताबिक, टिकटों की कालाबाजारी में शामिल गिरोह का प्रमुख सदस्य गुलाम मुस्तफा हाल ही में भुवनेश्वर से पकड़ा गया था. उससे पूछताछ में इस पूरे नेटवर्क का खुलासा हुआ. गिरोह के पास फर्जी आधार कार्ड एवं फर्जी पैन कार्ड बनाने की तकनीक है और बंगलादेश से लोगों को अवैध रूप से लाने एवं यहां बसाने का काम भी कर रहा था।

इस पूरे कालाबाजारी को हैंडल करने वाला दुबई में बैठा हामिद अशरफ मूलरूप से उत्तर प्रदेश का रहने वाला है. वह 2019 के गोंडा बम विस्फोट का आरोपी भी है. वर्ष 2016 में आरपीएफ ने हामिद अशरफ काे टिकट की कालाबाजारी में गिरफ्तार किया था. तत्काल टिकटों की कालाबाजारी से वह हर माह 15 करोड़ रुपए दुबई में बैठे-बैठे पाता है. अशरफ का सीधा कनेक्शन गुलमा मुस्तफा के साथ है।

मुस्तफा की शुरुआती पढ़ाई-लिखाई ओडिशा के केंद्रपाड़ा स्थित मदरसाें से हुई है. बाद में वह यहां से बेंगलुरु चला गया. वहां उसने 2015 में रेलवे टिकट की दलाली शुरू की।

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