कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की नागरिकता पर सवाल उठाते हुए उत्तर प्रदेश के अमेठी लोकसभा क्षेत्र से उनका नामांकन रद्द करने की मांग रिटर्निंग अफसर ने सोमवार को खारिज कर दी. राहुल गांधी के नामांकन पत्र को रिटर्निंग अफसर राम मनोहर मिश्रा ने वैध पाया . मालूम हो कि अमेठी से बहुजन मुक्ति पार्टी के उम्मीदवार अफजल वारिस और ध्रुवलाल समेत तीन निर्दलीय प्रत्याशियों ने राहुल की नागरिकता पर सवाल उठाया था. उन्होंने रिटर्निंग अफसर मिश्रा से शिकायत की थी कि राहुल ने ब्रिटिश नागरिकता ली थी इसलिए उनका नामांकन रद्द किया जाए.
राहुल के वकील कौशिक ने बताया कि चार लोगों ने आपत्तियां दाखिल की थीं. चारों में दिये गये सारे तथ्य बिल्कुल एक ही हैं. ऐसा लगता है कि चारों आपत्तियां एक साथ तैयार की गयी हैं. हमने हर सवाल का जवाब दिया है. उन्होंने बताया कि नागरिकता का मुद्दा उच्चतम न्यायालय के सामने आया था, उसमें जो निर्णय लिया गया, उसकी एक प्रति हमने रिटर्निंग अफसर को दी है. इसके अलावा नागरिकता को ही लेकर इलाहाबाद उच्च न्यायालय में दायर मुकदमे के निर्णय की प्रति भी हमने लगायी है. तीसरा, हमारा कहना यह है कि नागरिकता अधिनियम की धारा—2 के तहत स्पष्ट कहा गया है कि रिटर्निंग अफसर ऐसे मामलों पर विचार नहीं कर सकते. हमने रिटर्निंग अफसर से कहा कि ये सभी आपत्तियां निराधार हैं और आपको इस बारे में फैसला करने का अधिकार भी नहीं है.
ऐसे मामले सिर्फ नागरिकता कानून के तहत निर्धारित अदालत ही देख सकती है. कौशिक ने कहा कि राहुल ने वर्ष 1995 में कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से एम.फिल. किया था, उसकी डिग्री की एक कॉपी हमने जवाब के साथ लगायी है. उसमें उनका नाम राहुल गांधी ही लिखा हुआ है. राहुल की नागरिकता पर सवाल उठाने वाले याची ध्रुवलाल के वकील रवि प्रकाश ने कहा कि वह इस मामले को कानून के हिसाब से आगे लेकर जाएंगे. उन्होंने कहा कि जहां तक नागरिकता का सवाल है उसे सम्बन्धी कानून में निर्धारित प्राधिकारी ही देख सकता है.
हमने रिटर्निंग अफसर से कहा कि राहुल ने जो कम्पनी बनायी थी, उसके वर्ष 2006 के वार्षिक विवरण में राहुल ने खुद को ब्रिटिश नागरिक बताया है, लिहाजा इसी आधार पर उनका नामांकन रद्द होना चाहिये. राहुल के वकील ने शिकायत में व्यक्त आपत्तियों पर जवाब के लिए समय मांगा था. निर्वाचन अधिकारी ने 22 अप्रैल सोमवार पूर्वाह्न साढे दस बजे का समय तय किया था.
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