शुक्रवार को लोकसभा चुनाव के लिए वाराणसी से अपना नामांकन दाख़िल करने से एक दिन पहले भारतीय प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक बड़ा रोड शो करके अपनी अपनी शक्ति का प्रदर्शन का किया।
मोदी के नामांकन के अवसर पर भारतीय जनता पार्टी की अगुवाई वाले गठबंधन एनडीए के क़रीब सभी नेता मोदी के साथ वाराणसी कलेक्ट्रेट कार्यालय में उपस्थित रहे।
इसकी तुलना में अमेठी में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने अपने नामांकन के लिए यूपीए के नेताओं की भीड़ के स्थान पर अपने परिवार को चुना था।
इससे पहले वायनाड में राहुल गांधी के नामांकन के वक़्त केवल प्रयंका गांधी ही उनके साथ थीं।
दोनों नेताओं के नामांकन की शैली पर उनके स्वभाव और राजनीति के अंदाज़ की झलक साफ़ नज़र आती है।
राहुल गांधी जहां टीम वर्क और ज़िम्मेदारियों को बांटकर काम करने को प्राथमिकता देते हैं, वहीं वे आत्म केन्द्रित होने से बचते हैं और दिखावे से दूर ही रहते हैं।
इसके विपरीत प्रधान मंत्री मोदी अपनी शख़्सियत के इर्द गिर्द जो दायरा खींचते हैं, उस दायरे में किसी दूसरे का क़द सहन नहीं करते।
उनकी राजनीति की इसी शैली के कारण पूरी बीजेपी उनके ही इर्द गिर्द सीमित होकर रह गई है। बीजेपी पर इसका प्रभाव उस समय साफ़ तौर से नज़र आएगा, जब मोदी को पहली बड़ी हार का सामना करना पड़ेगा। msm
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