झारखंड
हाइकोर्ट से मानव तस्करी की आरोपित प्रभा मुनि को बुधवार को बड़ी राहत मिली.
हाइकोर्ट ने बुधवार
को उसे सशर्त जमानत दे दी. कोर्ट ने प्रभा मुनि को निचली अदालत में सुनवाई के दिन
उपस्थित होने और पासपोर्ट जमा कराने की शर्त पर जमानत दी है.
प्रभा
पर आरोप है कि वह दो एनजीओ की आड़ में मानव तस्करी का कारोबार करती
थी. दिल्ली में संपूर्ण घरेलू कामगार सर्वेक्षण एवं उत्थान समिति के अलावा वह
ऑल इंडिया क्रिश्चियन माइनॉरिटी संघ भी चलाती हैं. इंडिया क्रिश्चियन
माइनॉरिटी संघ की वह वाइस प्रेसिडेंट थी. प्रभा हर वर्ष 25 दिसंबर को दिल्ली में एक मेला लगाती थी,
जिसमें राजनीतिक दलों के नेता और बड़ी हस्तियां
शामिल होते थे. वर्ष 2018 में
उसकी गिरफ्तारी
के बाद सिमडेगा के एसपी संजीव कुमार ने कहा था कि इस सफेदपोश
गतिविधियों की आड़
में प्रभा मानव तस्करी का काला कारोबार कर रही थी. एसी ने प्रभा के बारे में कई और चौंकाने
वाले खुलासे किये थे.
मूल
रूप से जशपुर के डांडपानी की निवासी प्रभा करीब 13 वर्ष पूर्व दिल्ली गयी थी. वहां वेस्ट
पंजाबी बाग में बड़ा फ्लैट है. निहाल विहार दिल्ली में अपना कार्यालय चलाती थी.
यहीं प्रोडक्शन हाउस भी बना रखा था, जिसमें नागपुरी फिल्मी गीतों की शूटिंग होती थी.
उल्लेखनीय
है कि वर्ष 2013 के
जिस मामले में
प्रभा मुनि को पुलिस ने गिरफ्तार किया था, उस मामले में सिमडेगा पुलिस ने वर्ष 2015 में चार्जशीट दाखिल कर दी थी. दरअसल,
6 मई, 2013 को एएचटीयू थाना में प्रभा मुनि और उसके पति रोहित
मुनि के खिलाफ मामला दर्ज हुआ था. पुलिस ने आइपीसी की धारा 363,
370, 371, 372 और 379 के अलावा 23/26 जेके एक्ट, 14 चाइल्ड लेबर एक्ट और 5 आइपीसी एक्ट 1956 के तहत केस दायर किये थे. इनमें अपहरण की शिकार
तीन बच्चियों ने कोर्ट में कहा था कि प्रभा और रोहित बहला-फुसलाकर उन्हें दिल्ली ले गये,
काफी पैसा लेकर बड़ी कोठियों में काम करने के लिए सौंप
दिया. इसके बाद पुलिस ने दिल्ली से प्रभा को गिरफ्तार किया.
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