*बिना सरकारी स्कूल को सुधारे एक भी प्राइवेट स्कूल को यदि भाजपा सरकार ने झारखंड में बन्द करवाया तो इनकी ईंट से ईंट बजा देंगे- राजन कुमार सिंह, प्रदेश सचिव, आम आदमी पार्टी झारखंड*
रांची । रघुवर सरकार द्वारा छोटे प्राइवेट स्कूलों को मान्यता के नाम पर बंद करने के लिए लाए हुए नए नियम के खिलाफ आम आदमी पार्टी ने प्रेस क्लब रांची में प्रेस वार्ता का आयोजन किया।
वार्ता को संबोधित करते हुए पार्टी के प्रदेश सचिव राजन कुमार सिंह ने बताया कि भाजपा की रघुवर छोटे प्राइवेट स्कूलों के लिए मान्यता के लिए जो नए नियम लेकर आई है वो अत्यंत भयावह और जन विरोधी होने के साथ साथ शिक्षा विरोधी भी है। एक ओर भाजपा ने जान बूझ कर सरकारी स्कूलों को पूरी तरह लचर कर दिया है साथ ही राज्य के हज़ारों सरकारी स्कूलों को बंद किया और दूसरी ओर अब छोटे प्राइवेट स्कूलों को मान्यता के नाम पर बन्द करना चाहती है। राज्य में करीब 12, 500 छोटे प्राइवेट स्कूल हैं जहां करीब 8 से 9 लाख गरीब परिवार के बच्चे पढ़ते हैं। अगर ये स्कूल बंद हो गए तो ये गरीब परिवार के बच्चे कहाँ पढ़ेंगे? बिना इसका इंतजाम किए रघुवर सरकार का छोटे स्कूलों को बंद करने का मंशा ये साबित करता है कि भाजपा आम आदमी और गरीब के बच्चों को नहीं पढ़ने देना चाहती। भाजपा चाहती है कि सिर्फ और सिर्फ अमीर के ही बच्चे पढ़े तथा गरीब और आमआदमी के बच्चे किसी भी कीमत पर ना पढ़ें।
5वीं और 8 वीं कक्षा वाले निजी स्कूलों की मान्यता के नए नियम में में 30 साल के लीज वाला जमीन, खेल का मैदान, कम से कम 400 वर्ग फ़ीट के कमरे, चार दीवारी, दो तिहाई खुला भूमि, सीसीटीवी कैमरा, अग्निशमन सुरक्षा प्रमाण, तड़ित चालक की उपस्थिति आदि जैसे शर्त रखे हैं।
ये वैसे शर्त हैं जो सरकार खुद सरकारी स्कूलों में नहीं पूरा करती। निजी स्कूलों में जो सरकार जो सुविधा ढूंढ रही है, सरकारी स्कूल में खुद गायब है। राज्य में सरकारी स्कूलों के दशा बद्तर है, कई स्कूलों में विषयवार शिक्षक नहीं है। ऐसी स्थिति में बहुत से माँ बाप अपना पेट काटकर डेढ़-दो सौ रु से लेकर चार सौ-पाँच सौ रु महीने वाले छोटे प्राइवेट स्कूलों में अपने बच्चों को पढ़ने के लिए भेजते हैं। वो जानते हैं कि उन स्कूलों में बड़े स्कूलों की तरह सुविधा नहीं है, लेकिन सरकारी स्कूलों की ज़्यादा बद्तर स्थिति की वजह से वे उन छोटे प्राइवेट स्कूलों में अपने बच्चों को भेजने को मजबूर हैं। ऐसी स्थिति में यहाँ अपनी सरकारी स्कूल के व्यवस्था को दुरस्त करने के बजाए सरकार अपनी विफलता छुपाने के लिए कि छोटे प्राइवेट स्कूलों बन्द करने के साजिश के तहत और भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने के लिये इतना कड़ा नियम रघुवर सरकार ने लाया है। लाखों की संख्या में झारखंड के गरीब परिवार के बच्चे इन स्कूलों में पढ़ते हैं। अगर ये स्कूल बंद हो गए तो ये लाखों बच्चे शिक्षा से वंचित हो जायेगें । झारखंड में पहले ही भाजपा ने हज़ारों सरकारी स्कूलों को बन्द करवाकर लाखों गरीब बच्चों को स्कूली शिक्षा से दूर कर दिया।
आम आदमी पार्टी ये माँग करती है कि छोटे स्कूलों को मान्यता के लिए जो नया कानून लाया गया है और जो सुविधाओं के मापदण्ड तय किये गए हैं उसे राज्य सरकार पहले सरकारी स्कूलों में पूरा करे। साथ ही राज्य के सभी बच्चों के लिए दिल्ली के केजरीवाल सरकार के तर्ज पर प्राइवेट से बेहतर सरकारी स्कूलों की व्यवस्था करे तब किसी भी छोटे प्राइवेट स्कूलों को बंद करने की बात करे। साथ ही आम आदमी पार्टी ये माँग करती है कि छोटे स्कूलों के लिए मान्यता की जगह पर पंजीयन की व्यवस्था हो। कड़े मानकों और सुविधाओं की पूर्ति नहीं कर पाने की स्थिति में फाइन और स्कूल बंदी की जगह सुविधा के हिसाब से स्कूलों की ग्रेडिंग हो। साथ ही प्राथमिक और माध्यमिक स्कूल की मान्यता के बजाए पहली, दूसरी , तीसरी, चौथी से आठवीं कक्षा तक कक्षावार स्कूल चलाने के स्वीकृति की व्यवस्था हो। सरकार ने स्वयं इन स्कूलों को यू डाइस संख्या भी जारी किया है तथा ये स्कूल नियमित समय पर सरकार से अपनी सभी जानकारी साझा करते हैं। इतना ही नहीं सरकार ने स्वयं इन स्कूलों के हज़ारों शिक्षकों को डीएलएड का कोर्स कर इन्हें नियमित करने की योजना बनाई, और आज इन स्कूलों को बंद करने की साजिश के साथ साथ इन हज़ारों शिक्षकों के ऊपर भी तलवार लटका दिया।
ये भी ध्यान रहना चाहिए कि झारखंड में सीएनटी-एसपीटी कानून लागू है जहाँ 5 वर्ष से ज़्यादा का लीज अवधि नहीं हो सकता। अतः स्कूलों के लिए 30 साल की लीज अवधि को 5 साल किया जाए। इन छोटे स्कूलों से मान्यता के लिए 12,500 रु और 25,000 रु का आवेदन शुल्क खत्म किया जाए। साथ ही स्कूल के नाम पर 1 लाख के फिक्स्ड डिपोजिट के शर्त को हटाया जाए।
दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार ने सरकारी स्कूलों को विश्वस्तरीय बनाया है, डीएवी - डीपीएस जैसे प्राइवेट स्कूलों से बेहतर बनाया, जहाँ हमारे विधायक के बच्चे भी सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे हैं। वहाँ शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने साफ कहा कि दिल्ली में किसी छोटे प्राइवेट स्कूलों को बंद नहीं किया जाएगा । जबकि बदहाल सरकारी स्कूलों वाले झारखंड राज्य में छोटे निजी स्कूलों को बंद करने की साजिश चल रही है। आम आदमी पार्टी भाजपा और सरकार को चुनौती देती है कि राज्य के हर बच्चे के लिए अपने ही दिए हुए मानक वाला सरकारी स्कूलों की व्यवस्था किये बगैर एक भी निजी स्कूल को बंद किया गया तो सरकार की ईंट से ईंट बजा दी जाएगी। गरीब बच्चों की शिक्षा के साथ खिलवाड़ किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
प्रेस वार्ता में प्रदेश संयुक्त सचिव यास्मीन लाल तथा प्रदेश प्रवक्ता कुणाल कश्यप भी मौजूद थे।

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