डुमरी:बीते चार दशक से मुस्लिम समुदाय में राजनीतिक गिरावट आयी है और इसके लिए देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी जिम्मेदार है, क्योंकि उन्होंने अपने राजनीतिक फायदे के लिए मुसलमानों को सिर्फ वोट बैंक की तरह उपयोग किया लेकिन अब उनकी चाल सफल नहीं होने वाली है। यह कहना है कौमी इत्तेहाद मोर्चा की गिरिडीह लोकसभा क्षेत्र के उम्मीदवार मौलाना अब्दुल मोबीन रिजवी का। वे बुधवार को इस
संवाददाता से बातचीत कर रहे थे।उन्होंने कहा कि देश की सबसे पुरानी
राजनीतिक दल ने अपनी सियासी फायदे के लिए मुस्लिमों को भाजपा
का खौफ दिखाकर अपनी राजनीतिक रोटियां सेकती रही परंतु सच्चाई
यह है कि मुसलमानों की जितनी राजनीतिक व आर्थिक ह्रास यूपीए की
शासनकाल में हुआ उतना किसी के शासनकाल में नहीं हुआ है।कहा कि
1980 के बाद से लोकसभा में मुस्लिम समुदाय से विजयी होकर जाने वाले प्रतिनिधियों में लगातार गिरावट आई है और इसका एक कारण देश के प्रमुख राजनीतिक दलों द्वारा मुस्लिम उम्मीदवार को टिकट नहीं
के बराबर देना है।कहा कि हमारी आबादी देश में लगभग पच्चीस करोड़
है उसके बावजूद उसे उचित प्रतिनिधित्व का अवसर नहीं दिया जाता है।
बताया कि आजादी के बाद 1952 में पहली बार हुए लोकसभा चुनाव में 11 सांसद विजयी होकर संसद पहुंचे थे वहीं 1957 में 19 सांसद जबकि 1962 में 20 मुस्लिम सांसद विजयी होकर संसद पहुंचे थे।इसी
तरह 1967 में 25 सांसद,1972 में 28 सांसद,1977 में 34 सांसद,
1980 में 49 सांसद,1984 में 42 सांसद,1989 में 27 सांसद,1991
में 25 सांसद,1996 में 29 सांसद,1998 में 28 सांसद,1999 में 31
सांसद,2004 में 34 सांसद,2009 में 30 सांसद तथा 2014 में 22
सांसद मुस्लिम समुदाय से विजयी होकर संसद पहुंचे जो हमारी आबादी
के हिसाब से प्रतिनिधित्व कम है।कहा कि 2019 की लोकसभा चुनाव
में झारखंड में न तो महागठबंधन ने किसी मुस्लिम को उम्मीदवार बनाया
और ना ही एनडीए गठबंधन ने।बताया कि कौमी इत्तेहाद मोर्चा ने राज्य
के कम से कम तीन लोकसभा सीट क्रमश: गिरिडीह,चतरा व गोड्डा से
चुनाव लड़ने का फैसला लिया है।
फोटो:@#$&&&& फाईल फोटो मोबीन रिजवी की
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