Sunday, November 18, 2018

मध्य प्रदेश :सुषमा स्वराज द्वारा गोद लिए गांव अजनाश का पूछनहार नहीं

विदिशा ၊ आपको याद होगा कि जब 2014 में नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने थे तो उन्होंने सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत सभी संसदीय क्षेत्र में एक-एक गांव को मॉडल की तरह विकसित करने का वादा किया था और सभी सांसदों को एक एक गांव गोद लेने की अपील की थी ।

डॉक्टर सुरेश व्यास अपने एक कमरे के क्लिनिक में एक महिला मरीज़ का ड्रिप बदलते हुए कहते हैं कि उनके गांव की हालत अनाथालय के उस बच्चे की तरह है जिसे किसी अमीर ने मां-बाप की तरह ममता और अच्छी परवरिश देने का वादा किया था और बच्चा अब तक इंतज़ार में बैठा है. व्यास कहते हैं कि अब वो इंतज़ार भी ख़त्म हो गया है और उसने अनाथालय को ही अपनी नियति मान लिया है.

2014 में नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने थे तो उन्होंने सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत सभी संसदीय क्षेत्र में एक-एक गांव को मॉडल की तरह विकसित करने का वादा किया था.

सुषमा स्वराज मध्य प्रदेश के विदिशा से सांसद हैं और उन्होंने इसी संसदीय क्षेत्र के अजनास गांव को 2014 में मॉडल बनाने के लिए चुना था.

मध्य प्रदेशसुषमा स्वराज

अजनास देवास ज़िले में है, लेकिन परिसीमन के बाद यह विदिशा संसदीय क्षेत्र में चला गया है. इस गांव की आबादी क़रीब छह हज़ार है. गांव ओबीसी बहुल है. यहां गोंड आदिवासी और मुसलमान भी हैं. गांव में करीब 33,000 मतदाता हैं.

गांव के लोग सवाल करते हैं कि सुषमा ने इस गांव को गोद लेने की घोषणा की ही क्यों थी. इनका कहना है कि अजनास आदर्श ग्राम के नाम पर मज़ाक बनकर रह गया है।

गांव के एकमात्र स्कूल का हाल

दोपहर के बाद का वक़्त है और गांव के एकमात्र सरकारी स्कूल में लंच के लिए अभी-अभी इंटरवल की घंटी बजी है. यह उच्च-माध्यमिक स्कूल है और यहां पढ़ने वालों की संख्या क़रीब 800 है. स्कूल के प्रिंसिपल महेश माली तीन शिक्षकों के साथ अपने चेंबर में बैठे हैं.

मध्य प्रदेश
प्रिंसिपल महेश माली

चेंबर के नाम पर एक टूटा-फूटा कमरा है. कमरे की दीवार पर महान हस्तियों की तस्वीरें टंगी हैं. इन तस्वीरों में पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी भी शामिल हैं.

महेश मालवीय का कहना है कि वर्तमान राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की तस्वीर उन्हें मिली नहीं है इसलिए अभी बदल नहीं पाए हैं. प्रधानमंत्री मोदी की भी तस्वीर टंगी है लेकिन चुनाव आचार संहित की वजह से इसे पलट दिया गया है.

एक टेबल है जिस पर हिन्दू देवी-देवताओं की तस्वीरें और मूर्तियां हैं. बगल में ही 800 बच्चों के लिए दो शौचालय हैं.

जब पूछा कि महेश जी सुषमा स्वराज ने इस गांव को आदर्श ग्राम बनाने के लिए गोद लिया था और चार साल से ज़्यादा वक़्त हो गए, क्या कुछ बदला? तो पास में ही बैठे एक शिक्षक ने धीमी आवाज़ में तंज करते हुए कहा, ”आदर्श ग्राम वाली ख़ुशबू आ तो रही है. महसूस कीजिए.” दरअसल, पास के शौचालय से तेज़ बदबू आ रही थी ၊

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